Friday, 28 February 2020

हर एक मोड़ पर

2122 1221 2212 2122 12
ज़िंदगी के हर एक मोड़ पे बस तुम्हारी निशानी मिली
जितने पन्ने पलटते गये सब में एक ही कहानी मिली

उम्र ढल भी गयी तो भी क्या तुम चले भी गये तो भी क्या
गाँव लौटे तो हमको वही अपनी ज़िंदा जवानी मिली

फिर कई साल के बाद हम अबके होली में रंगीन हैं
घर की संदूकची में दबी एक चिट्ठी पुरानी मिली

होंगी मौसम की मज़बूरियां उसने हमको न मिलने दिया
पर मेरे सामने जब पड़ी बर्फ भी पानी पानी मिली

जय बोलो मतदाता की

लोकतंत्र के अग्रपूज्य की भारत भाग्य विधाता की
निर्वाचन का महायज्ञ है, जय बोलो मतदाता की

जय जनता में निहित शक्ति की
जय पुनीत इस राष्ट्रभक्ति की
लोकतंत्र में पुण्य आस्था
संविधान के हेतु भक्ति की

जननायक की जय से पहले जननायक निर्माता की

मूर्तिकार है जो सर्जक है
वही चेतना का मूलक है
केंद्र वही है इस रचना का
वही शक्ति का उत्सर्जक है

शक्ति पूजने से पहले जय बोलो शक्ति प्रदाता की

सर्वप्रथम अभिनंदन किसका
रोली टीका चन्दन किसका
कहलाता गणतंत्र मूल, जो
राष्ट्र हृदय स्पंदन, उसका

लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी संविधान अवधाता की

  

मुक्तक बरसात

कभी श्यामल घटाओं से घिरी फिर रात ना होगी
समंदर झील नदियों ताल की फिर बात ना होगी
अगर पेड़ों को काटोगे बिना सोचे बिना समझे
तो यारों इस धरा पर फिर कभी बरसात ना होगी

झूम कर मेघ कोई छत पे जब बरसता है
मुझको लगता है मेरे हाल पे वो हँसता है
साथ भीगे थे कभी जैसे बारिशों में हम
भीग जाने को फिर से मन मेरा तरसता है

नाम धरती के  अपनी  सारी  ज़वानी  लिख  दी
मिटा के ख़ुद को मोहब्बत की निशानी लिख दी
जो मेरी आँख  की  कोरों  में  आ  के  ठहरी  थी
बादलों  ने  बरस  के  वो  ही  कहानी  लिख  दी


2122 2122 2122 212

हम उसी एक शख्स से उम्मीद पाले रह गए
ताले रह गए

Saturday, 31 August 2019

मुक्तक

बीमारी का हाल चलो  बीमारों  से   पूछा  जाये
मज़बूरी का अर्थ इन्हीं  लाचारों  से  पूछा  जाये
होगा क्या उपचार, ग़रीबी जैसी बीमारी  का भी
प्रश्न ज़रूरी है, चलकर सरकारों  से  पूछा जाये
                       
-प्रवीण 'प्रसून'
08896865866

Monday, 8 October 2018

मुक्तक

यही है खून से सींचे हुये अभिमान की माटी
जहां हँस कर लुटाते जाँ यही बलिदान की माटी
जो माँ पर आँच ना आने दें ऐसे शेर से बेटे
जना करती है अपने देश हिंदुस्तान की माटी

माँ तेरी कृपा से हम आकाश झुका देंगे
ग़र पड़ी ज़रूरत तो खुद को भी मिटा देंगे
एक माँ तू एक माँ है अपनी भारत माता
यहाँ दीप जला देंगे वहाँ, शीश कटा देंगे

कर दें जो मन मधुर घण्टियाँ पूजिये
शक्तिरूपी कनक रश्मियाँ पूजिये
माँ को खुश करने का है तरीका सरल
भगवती रूप में बेटियां पूजिये

शान को अपनी परिंदों की शान तक रखना
हसरतें आप भी ऊँची उड़ान तक रखना
ठोस आधार का होना मगर ज़रूरी है
ज़मीं पे पाँव ख़्वाब आसमान तक रखना

शांति सद्भाव का रंग धो जायेगा
होगा अन्याय तब न्याय खो जायेगा
शक्ति का यदि अहं से हुआ मेल तो
एक रावण वहीं पैदा हो जायेगा