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Monday, 26 June 2017

हाइकु :बेटी

बेटी की आँखें
ख्वाबों की तितलियाँ
सजीली पांखें

रोली चन्दन
रंग संग खुशबू
लक्ष्मी वन्दन
 

पिता के ख़्वाब
     सच करेगी बेटी
              रखती ताब
        

छूती शिखर
बिटिया पढ़कर
काटो न पर

वीणा झंकार
सरस्वती साकार
हँसी बिटिया
    :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

हाइकु: बहू

बहू का मौन
संभालता है क्या क्या?
जाने ये कौन!
    :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

बहू है वही
दो पाटों के बीच जो
नदी-सी बही
      :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

नेह ऊन से
संबंधों के स्वेटर
बुनती बहू
    :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून

फटे कपड़े
तालमेल बिगड़े
बहू बनाती
     :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

बहू बनाती
नेह से सींच कर
घर को घर
      :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

Wednesday, 31 August 2016

हाइकू

दिल्ली की आज की दो ख़बरों पर  एक हाइकु।
यदि लगे कि दोनों स्थितियों पर एक ही हाइकु सटीक है तो लाइक करके आशीष प्रदान करें।

हे भगवान!
आख़िर डुबा ही दी
'आप' ने दिल्ली
    :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
      फतेहपुर उ.प्र.
      08896865866

Sunday, 17 July 2016

हाइकु

पानी की नाव
दे गई पानी को ही
अदृश्य घाव

Wednesday, 1 June 2016

'आभी' से

'आभी' पर हाइकु:

'आभी' सिखाती
भटके मानव को
    प्रकृति प्रेम

जीने की चाभी
प्रकृति संरक्षण
बताती 'आभी'

झील का पानी
'आभी' श्रम पावन
बाँटें जीवन

हो शुरुआत
तालाबों की तलाश
'आभी'-प्रयास

सीखें 'आभी' से
  प्रकृति संरक्षण
    जीवन मूल
  
  :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून

Sunday, 1 May 2016

पाँच हाइकु

1.
विकास पथ
ऊँच-नीच का भाव
खींचता पाँव
2.
जीवन पथ
धूप-छाँव समेटे
बढ़ सतत
3.
मन सँजोये
श्वेत-श्याम तस्वीरें
बीते दिनों की
4.
जिंदगी ट्रेन
बनते-बिगड़ते
रिश्ते हज़ार
5.
एक ही राह
मंज़िल कब्रगाह
धनी-निर्धन

Tuesday, 26 April 2016

हाइकु बैलों के

माटी की गोदी
बैलों का श्रम बोये
मोती ही मोती

बैलों की जोड़ी
अथक परिश्रम
बरसे अन्न

ऐसी प्रगति
बैल बेरोज़गार
वक़्त की मार

ग़ुम हो गई
ट्रैक्टर के शोर में
बैलों की घंटी

Thursday, 3 March 2016

नारी पर हाइकु

नारी सजाती
जीवन फुलवारी
माधुर्य सींच

नारी-तुलसी
मिलकर सँवारी
आँगन क्यारी

कोकिल स्वर
गृहिणी के गीतों से
गुंजित घर

कोमल मन
बदन मखमली
नाज़ुक कली

लाडो तितली
बतियाँ चुलबुली!
शहद घुली

शांत सतह
छुपाये ज्वार भाटा
नारी हृदय

ममता घन
वात्सल्य की पवन
वर्षा सघन

साड़ी लिपटी
सघन संवेदना
दया,करुणा

-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
फतेहपुर उ.प्र.

Thursday, 25 February 2016

बासंती हाइकु

पाती को चूम
गदराया गोधूम
किसने भेजी?

हँसी तितली
दिलफेंक पलाश
खो बैठा होश

कोई बौराया
देख चुनर पीली
रंगीले दिन

Thursday, 18 February 2016

हाइकु

मेरा सृजन
अमर लाइब्रेरी
पाठक मन

देह मिटेगी
आत्मा देगी सन्देश
कविताओं में

Tuesday, 16 February 2016

हाइकु

बनते नग
इससे पहले ही
बहके पग

प्रचार बोध
समर्थन से ज़्यादा
ठीक विरोध

मन का मैल
फैला रहा दुर्गन्ध
हवा में फैल

झाँकता तन
फटा ब्लाउज देख
फैले हैं फन

मौन हैं गुरु
जेएनयू में हिट
दूजा ही 'गुरु'?

प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
फतेहपुर उ.प्र.

Thursday, 4 February 2016

शब्द हाइकु

शब्द पर पाँच हाइकु
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

शब्द  सजाते
महफ़िल आपकी
यादें दे जाते।

शब्द सार्थक
बना दें इतिहास
ऐसी ताकत।

शब्द की ईंटें
काव्य की इमारत
भावों की नींव।

शब्द जो देते
घाव बड़े गहरे
शब्द ही भरें।

शब्द तोड़ते
सन्नाटे के पत्थर
मौन की कारा।

-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
फतेहपुर उत्तर प्रदेश

शब्द हाइकु

शब्द पर पाँच हाइकु
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

शब्द  सजाते
महफ़िल आपकी
यादें दे जाते।

शब्द सार्थक
बना दें इतिहास
ऐसी ताकत।

शब्द की ईंटें
काव्य की इमारत
भावों की नींव।

शब्द जो देते
घाव बड़े गहरे
शब्द ही भरें।

शब्द तोड़ते
सन्नाटे के पत्थर
मौन की कारा।

-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
फतेहपुर उत्तर प्रदेश

Saturday, 23 March 2013

गौरैया:हाइकू में

सूना आँगन
उड़ चुकी गौरैया
हमसे दूर

डाल  से डाल
गौरैया ना फुदकी
बड़े दिनों से

गौरैया पगी
चहचहाई जब
छुटकी जगी

क्या है गौरैया?
करेगा बचपन
गूगल सर्च

Friday, 4 January 2013

2-हाइकू

रोता रहा मैं
ट्वीट कर वो चला
बहुत खला

---------------­­-
ग़म में हम
फेसबुकिया सारे
लाइक मारें

Friday, 7 December 2012

पाँच हाइकू सम्माननीय किसान बंधुओं के लिए-


और की भूख
परिणाम सम्मुख
भूमि बंजर

भूमि है माता
भर देगी उदर
प्यार तो कर

पाले उदर
दवा के नाम पर
दे ना ज़हर

चला फावड़ा
कृषिभूमि में सच
स्वर्ण है गड़ा

पसीना बहा
खेत का है संदेश
आँसू ना बहा


Tuesday, 4 December 2012

हाइकू दिवस पर

साहित्याकाश
प्यारे हाइकु तारे
चमकें सदा

काव्य नभ के
झिलमिल सितारे
हुए हाइकु

गीत सूरज
ग़ज़ल आफ़ताब
हाइकू तारे

Sunday, 25 November 2012

जीवन क्या है?:हाइकू

जीवन क्या है?
उसके जैसा जानूं
इरोम चानू
जीवन क्या है?
सातवाँ सिलेण्डर
पेट की आग
 जीवन क्या है?
शहर में अकेला
गाँव का मेला
जीवन क्या है?
कभी तो चुटकुला
कभी पहेली
 जीवन क्या है ?
सच को छुपा जाना
झूठ दिखाना
क्या है जीवन?
अपनी अलमारी
पराया धन
जीवन क्या है?
जीने को तो जी लिए
जान न सके
जीवन क्या है?
वट जैसा जीवट?
.........छुईमुई-सा?
 
 
 
 
 
 

Monday, 1 October 2012

१.
सीमायें हारीं
प्यार न बांध सकीं
टूटीं स्वयं ही
2.
सीमा से परे
उड़ान सपनों की
पूरे-अधूरे

3.

भूल गया जो
अनुशासन-सीमा
भूला उन्नति

4.

नेह पसरा
दिल से दिल तक
सिमटी सीमा
5.
सरल हिंदी
बहती नदिया सी
तरल हिंदी
करती रससिक्त
जीवन भाव रिक्त
6.
समर्थ हिंदी
गरिमामय भूत
उज्ज्वल भावी
संवारो वर्तमान
मातृभाषा महान
7.
प्यारी मातृभू
मातृभाषा क्यूँ नहीं
सोचो तो जरा
हिंदी का अधिकार
पूरे देश का प्यार
8.
दिखलायेँगे
सपनोँ का संसार
यही सहारे
9.
दिल से दिल
प्रतीक मिलन का
हाथ मेँ हाथ
10.
जीवनसाथी
छोड़ना मत हाथ
सुख-दुःख मेँ
11.
चलते चलेँ
सुगम हुईँ राहेँ
संग तुम्हारे
12.
पीछे छोड़ दी
रिवाजोँ की बेड़ियाँ
सच्चे प्यार मेँ