Showing posts with label व्यंग्य. Show all posts
Showing posts with label व्यंग्य. Show all posts

Thursday, 19 May 2016

फुरसतिया

        फुरसतिया
         ----------------
-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

चुनाव के परिणाम देखकर मैं दंग तो बिल्कुल नहीं हुआ क्योंकि पता था कमान राहुल गाँधी के हाथ में है। वैसे अब भाजपा वाले भी राहुल भइया से प्यार करने लगे हैं । महात्मा गाँधी के लिए लिखा गया था चल पड़े जिधर दो डग मग में चल पड़े कोटि पग उसी ओर अब वर्तमान गाँधी के साथ इसका बिल्कुल उल्टा हो रहा है ऐसा क्यों??????
ख़ैर मेरी समझ में तो आने से रहा! मैं पहुँच गया फुरसतिया के पास।
फुरसतिया ने पानमसाले की पीक मारी और बोला यार य तो बहुतै आसान सवाल है राहुल म कउनो कमी नहीं आय। कमी हवे उनके नाम म।
मैं चकित होते हुए बोला वो कैसे?
फुरसतिया ने सौ टके की बात कही।
नाम है राहुल मतलब 'राहु' + 'ल' समझेव?????
कुच्छ नहीं बेटवा नाम बदलो समझो काम होइगा!!!!!
मैं सर खुजलाते हुए लौट पड़ा।

Monday, 16 May 2016

फुरसतिया

यार ये बग़दादी नाम कैसे पड़ा होगा? प्रवीण प्रसून के दिमाग़ में फतेहपुरिया फ़ितूर कौंधा।
काफ़ी कपालभांति के बाद जब कुछ पल्ले नहीं पड़ा तो पहुँच गए फुरसतिया के पास।
फुरसतिया ने पहले पान मसाले की पीक मारी फिर समझाया य तो बहुतै आसान सवाल है। बगदादी  आतंकी किरवा(कीड़ा) पालै वाला मनई। असल नाम है bug daddy। तुम्हरे अइस हिन्दी के पढ़ेरी बग दादी पढ़ि लिहिन। होइगा.....
मैं सर खुजलाते हुए लौट पड़ा।