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Sunday, 9 July 2017

दोहे: तुलसी

कृपा अगर कर दें स्वयं, कृपा सिंधु श्रीराम।
चमके जग में नाम यूँ, जैसे तुलसी नाम।।

जीवन के सब पथ कठिन, हो जाते आसान।
तुलसी ने जग को दिया, मानस में वो ज्ञान।।

सूरज तुलसी सा मिले, जग को नवल प्रभात।
रत्न तराशे जब कभी, हुलसी जैसी मात।
   :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

Tuesday, 21 February 2017

दोहे

जड़ को भी भाया नहीं, छल,पाखण्ड, प्रपंच।
ठगबंधन के  बोझ  से टूटा  देखो मंच।।
     : प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

Monday, 20 February 2017

दोहे

दोनों को सँग देखकर, कुछ यूँ कहें 'प्रसून'।
यूपी के सौभाग्य से, "गंजे को नाखून" ।।
स्वार्थपूर्ति को टेक दें, रावण के दर माथ।
यू पी को सब है पता, कैसा है ये साथ!!
कुछ दिन पहले दिख रहा, था यू पी बेहाल।
खुदगर्ज़ों के हाथ से , मारे गए सवाल।।

Tuesday, 7 February 2017

दोहा


सत्ता, सन्त-समाज बिच, रेखा का अब अन्त।
राजनीति में साथ हैं, दोनों सन्त-असन्त।।
       प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

Monday, 6 February 2017

दोहे

थोड़ी   मेरे   पास   हैं ,  थोड़ी   तेरे  पास ।
चल जनता के सामने ,फिर से डालें घास।।
सारी अंदर की ख़बर, पहुँच चुकी है गाँव।
ज़्यादा दूर न जायगी, गठबंधन की नाव।।
साथ-साथ अब आ गये, राहुल सँग अखिलेश
कह 'प्रसून' जग जाइये, जहाँ झूठ तँह क्लेश

Sunday, 11 September 2016

गाँव आदर्श

रोज़गार, बिजली,सड़क, पग-पग पर संघर्ष।
दर्ज़ कागजों में मिला गाँव वही आदर्श।
             :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
             08896865866

गाँव आदर्श

रोज़गार, बिजली,सड़क, पग-पग पर संघर्ष।
दर्ज़ कागजों में मिला गाँव वही आदर्श।
             :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
             08896865866

Thursday, 8 September 2016

सर जी

सबको सरजी मत कहो सरजी शब्द विशेष।
सर जी बस वो खास हैं धरे आम जो भेष।
            :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
              फतेहपुर उ.प्र.

Thursday, 25 August 2016

उतने बदले रूप।

जितनी पड़ीं ज़रूरतें, उतने बदले रूप।
तू अर्जुन की छाँव है, दुर्योधन की धूप।।
कैसे इस उपकार को, भूलेगा संसार।
एक कृष्ण के जन्म से , पापी मिटे हज़ार।।

Sunday, 7 August 2016

गोरक्षा

कुछ शरारती कर रहे, हिंदु धर्म बदनाम।
गोरक्षा की आड़ में, गोरखधंधा आम ।।
        :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

Saturday, 23 July 2016

दोहे

उनके ऊपर चल गई, उनकी ही बंदूक।
राजनीति का दाँव जब, गये ज़रा सा चूक।।

दोहे

राजनीति के खेल में, नारी का अपमान।
अपशब्दों ने फिर यहाँ, मार लिया मैदान।।

तू मुझको दो चार कह, मैं तुझको दो चार।
रहे मीडिया में बने, फ्री में हुआ प्रचार।।

पॉलिटिक्स में फेम ले , गाली देना सीख।
मुख्य ख़बर बन जायगी, गला फाड़कर चीख।

मँहगी बिकती गालियां, सस्ता शिष्टाचार।
राजनीति का हो रहा, ऐसा कुछ व्यापार।।

पिछली बातें भूलकर, फिर दे देती वोट।
जनता भोली इस तरह, फिर फिर खाती चोट।।

पहले थे ड्रग माफ़िया, फिर गुंडों के बाप।
"माननीय" हो ही गए, धीरे-धीरे आप।।
       :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

Friday, 10 June 2016

वनरोज: दोहे

नीलगाय को मारकर, रँगे खून से हाथ।
कैसा मानव धर्म यह, पशुता पशु के साथ।।

हैं मनुष्य भी तो बहुत, करते हैं नुकसान।
इन पर भी वनरोज सँग, दो बंदूकें तान।

मारो मत वनरोज को, कर लो यह संकल्प।
मानवता जीवित रहे, ऐसा रचो विकल्प।।

क्या निरीह वनरोज का, जीवन है बेमोल!
और तरीकों से करो, जनसंख्या कंट्रोल।।

तड़प तड़प कर मर गई, छौने हुए अनाथ।
मानवता मारी गई, नीलगाय के साथ।

Wednesday, 1 June 2016

दोहा

बहुत कठिन कैसे कहूँ, कितना माँ का प्यार।
थोड़ी कोशिश कर रहा, जैसे जग विस्तार।।

-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

दोहा

जीवन बगिया में खिलें, सम्बन्धों के फूल।
बस अवसर पर झाड़ लो, अंतर्मन की धूल।

Tuesday, 10 May 2016

दोहे

हमें न डिग्री चाहिये, हो विकास भरपूर।
क्यों कबिरा को पूजते, थे मसि कागद दूर।

बीटेक एमटेक बाद कुछ, मचा रहे आतंक।
लेकर डिग्री देश को, मार रहे हैं डंक।

डिग्री लेकर सोचते, बन बैठे हम बाप।
अभी और मेहनत करो, बेटा ही हो 'आप'।

सुनो केजरीवाल तुम, है तुममें उलझाव।
मोदी की डिग्री सुनो! राष्ट्रभक्ति का भाव।

बेमतलब की बात को, मत दो ऐसे तूल।
पीएम मोदी सा हमें, सौ सौ बार क़बूल।

अन्ना के विश्वास पर, दिये अँगूठा मार।
सबकी डिग्री लग रही, अब इनको बेकार।
    प्रवीण श्रीवास्तव 'प

Tuesday, 9 February 2016

वैलेंटाइन स्पेशल दोहे

वैलेंटाइन स्पेशल दोहे

अपने अपने तौर से,सब कर रहे प्रपोज।
कुछ को मुस्कानें मिलीं, कुछ ने पाई डोज।

मन में ही करता रहा उसको रोज़ प्रपोज।
मुझसे पहले दे गया कोई 'रेड 'रेड रोज।

कैसे करूँ प्रपोज मैं, राह बताओ आप?
भाई है बजरंगिया, शिवसेना में  बाप।

फूलों वाला कह रहा, ले लो सस्ते रोज।
सौ रुपये के नोट में, दस को करो प्रपोज।

दो जगहों पर शिफ्ट है, लव का सब सामान।
ग्रीटिंग वाली गैलरी, फूलों की दूकान।

लैला मजनूं हम नहीं, हम हैं गर्ल व ब्वाय।
नाम प्यार का दूसरा, होता है इन्जॉय।

लवर ब्याय हूँ जान ले, कैसे लूँगा चान्स।
जा तू दूजा ढूँढ ले, मेरी है अडवांस।
✒ प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
     फतेहपुर उत्तर प्रदेश
📱 8896865866

Saturday, 30 January 2016

दोहा

ऐसा भी क्या डर भला जो ले जीवन छीन।
जिओ सदा ही मस्त हो रहो भले दिन तीन।

Friday, 1 January 2016

बियर पिलाते दोस्त

                  पाँच दोहे

नया वर्ष कुछ यूँ मना बियर पिलाते दोस्त |
कमर हिलाती लड़कियाँ, मूवी, मुर्गा, गोश्त।

नए वर्ष में क्या नया , केवल इक तारीख़।
अभी यहाँ वो निर्भया, रही कहीं पर चीख।

नए वर्ष का दिन नया, जब खोला अख़बार।
अच्छे दिन के कुछ नहीं, दिखे मुझे आसार।

नए वर्ष में सब नया , कैसे होगा सोच।
सागर भरा अथाह है, लघु चिड़िया की चोंच।

नए वर्ष के ज़श्न में, हुआ मुझे यह ज्ञान।
आगे है यह युग युवा, हूँ मैं ही नादान।
कॉपीराइट@
-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून' www.praveenkumarsrivastav.blogsot.com
8896865866

Saturday, 26 December 2015

ऑड इवन

संसद को भी मिल सके ध्वनी प्रदूषण मुक्ति।
ऑड इवन की तर्ज़ पर लघु गुरु वाली युक्ति।
-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून