दर्द सहना अभी आया नहीं है
शेर कहना अभी आया नहीं है
मौन रहना अभी आया नहीं है
तेज बहना अभी आया नहीं है
और दहना अभी आया नहीं है
ज़ल्द ढहना अभी आया नहीं है
:प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
2122 1212 22
आज तिनकों को फिर चुना जाये
और फिर घोसला बुना जाये
छोड़ कर क्यों गया मुझे पंछी
सोच कर के शजर घुना जाये
आप की आँख हो रही है नम
आप से क्या कहा सुना जाये
सर्द कोहरा है और दिल
इश्क़ में हो ये कुनकुना जाये
महफ़िलें दिल सजा के बैठा है
काश पाज़ेब रुनझुना जाये
मुझे अंगार में रहने की आदत हो गयी है
किसी के प्यार में रहने की आदत हो गयी है
फ़लक पर हूँ जमीं पर मैं उतर सकता नहीं हूँ
मुझे अख़बार में रहने की आदत हो गयी है
ज़रूरत पर बिका था मैं हक़ीक़त है मगर अब
उसी बाज़ार में रहने की आदत हो गयी है
हुआ है ख़ास जबसे वो ज़माने से कटा यूँ
उसे दो चार में रहने की आदत हो गयी है
उसे सम्बन्ध-नाते प्यार कारोबार ही लगते
जिसे व्यापार में रहने की आदत हो गयी है
:प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
फतेहपुर उ.प्र
इस उम्र के असर से, कुछ रंग खो गये हैं
कुछ चित्र ज़िन्दगी के, बेरंग हो गये हैं
स्मृति के चित्रपट पर
जो चित्र थे उकेरे
बरसात ये समय की
बैठी हुई है घेरे
कुछ अंश बच गये हैं, कुछ अंश धो गये हैं
कुछ रंग प्यार के थे
कुछ रंग दुश्मनी के
कुछ रंग मेल के तो,
कुछ थे तनातनी के
इकरंग हो गये सब, मन को भिगो गये हैं
इक रंग बचपना था
इक रंग थी जवानी
चेहरे की झुर्रियों में
लिख दी है सब कहानी
पन्ने पलट के पढ़ना, हम क्या सँजो गये हैं
:प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
फतेहपुर उ.प्र.
08896865866