और वो लेकर रवानी बीच धारे हो गये।
ख़ैर ये अच्छा रहा वो बेसहारे हो गये।
लोग वो ख़ुद की चमक से ही सितारे हो गये।
कुछ तुम्हारे हो गये, कुछ ग़म हमारे हो गये।
ख़्वाब आँखों की हदों में कैद सारे हो गये।
:प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून
ठग गया विश्वास फिर से क्या कहूँ मैं क्या हुआ।
फिर मुझे लगता है मेरे साथ इक धोखा हुआ।
बेच मत देना शहीदी खून को इस बार फिर,
चुप न बैठेंगे अगर इस बार ये सौदा हुआ।
एक बेटे के लिए इससे बुरा दिन और क्या!
उसकी माँ पर ग़र उसी के सामने हमला हुआ
शेर है तो शेर जैसा वार भी तो चाहिए।
किस सियासी चाह में सीना बता छोटा हुआ।
बीन सुननी है नहीं मुझको सपेरे जान ले,
विष भरा फन चाहिए इस बार तो कुचला हुआ।
ला सके सत्रह के बदले ग़र न सत्रह लाख सर,
बेरहम दुश्मन से फिर बदला भी क्या बदला हुआ।
कह रही दुनिया जिसे ये देश है सबसे जवां,
अब कहीं कहने न लग जाये कि ये मुर्दा हुआ।
:प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
फतेहपुर उत्तर प्रदेश
08896865866
चोट से काँच का सामान बिखर जाता है
वक़्त मुँह मोड़ ले अरमान बिख़र जाता है
और तूफ़ान में गिरकर के सँभल भी जाये
इश्क़ में हार के इन्सान बिखर जाता है
: प्रवीण 'प्रसून'
रोज़गार, बिजली,सड़क, पग-पग पर संघर्ष।
दर्ज़ कागजों में मिला गाँव वही आदर्श।
:प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
08896865866
रोज़गार, बिजली,सड़क, पग-पग पर संघर्ष।
दर्ज़ कागजों में मिला गाँव वही आदर्श।
:प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
08896865866