माटी की गोदी
बैलों का श्रम बोये
मोती ही मोती
बैलों की जोड़ी
अथक परिश्रम
बरसे अन्न
ऐसी प्रगति
बैल बेरोज़गार
वक़्त की मार
ग़ुम हो गई
ट्रैक्टर के शोर में
बैलों की घंटी
माटी की गोदी
बैलों का श्रम बोये
मोती ही मोती
बैलों की जोड़ी
अथक परिश्रम
बरसे अन्न
ऐसी प्रगति
बैल बेरोज़गार
वक़्त की मार
ग़ुम हो गई
ट्रैक्टर के शोर में
बैलों की घंटी
'क' से किसान
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मैं 'क' से किसान हूँ
'ख' से खेती करता हूँ
'ग' से गाँव में रहता हूँ
और......
अब आप सोचेंगे 'घ' से क्या..?
तो सुनिये
'घ' से घोषणाएँ सुनता हूँ सरकारी
'क' से किसान
जो कहने को तो
आता है सबसे पहले
लेकिन वास्तविकता....
मैं हूँ 'ङ' जिसके माने होता है
कुछ नहीं....कुछ भी नहीं
नयी तकनीक ने छीन
लिया है मुझ 'क' से
जो था मेरे पास
डंडा भी और पूँछ भी
लेकिन 'ङ' बनकर
पंक्ति के सबसे अंत में
बैठे हुये
एक चीज़......शून्य
पहले भी था
और अब भी है मेरे पास
-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
फतेहपुर उ.प्र.
08896865866
रात से ख़ूब आशनाई की।
बात की आपकी जुदाई की।
और मजबूरियाँ रहीं होंगी,
बात मुमकिन न बेवफ़ाई की।
खूबियाँ कोहिनूर वाली हैं।
बस ज़रूरत जरा घिसाई की।
प्यार तू किस तरह निभायेगा,
फ़िक्र करता है जगहँसाई की।
ओढ़ जो सो गया थकन अपनी,
क्या ज़रूरत उसे रजाई की।
-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
फतेहपुर उ.प्र
कुछ हुए काम के हादसे कम से कम।
सामने आ गए दोगले कम से कम।
वो भले आपसे दूरियाँ मानते,
आप तो प्रेम से बोलते कम से कम।
फूल सा बन, कोई तोड़ ले ग़र तुझे
दूर तक खुशबुएँ घोल दे कम से कम
ऐ ख़ुदा तू मिला दे ख़ुदा से मुझे,
इक दफा ही सही वो मिले कम से कम।
आप खंज़र लिए घूमने लग गये,
वक़्त का फ़ैसला देखते कम से कम।
-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
दर्द को दिल में बसाया कीजिये।
आँख से यूँ मत बहाया कीजिये।
बूँद जैसे बन गई रह सीप में,
दर्द को मोती बनाया कीजिये।
चाँद आता है तुम्हीं को देखने,
शाम को खिड़की पे आया कीजिये।
झूठ सुनने की बुरी लत छोड़िये ,
यूँ न सच पे तिलमिलाया कीजिये।
हम हक़ीक़त जान लेते हैं सनम,
आप अफ़साने सुनाया कीजिये।
-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
आइने से धुंध अब छँटने लगी है।
जो हक़ीक़त है मुझे दिखने लगी है।
देशद्रोही सोच जो बोई गई थी,
एक ज़हरीली फ़सल पकने लगी है।
और कब तक छुप रहोगे आवरण में,
अब बनावट की परत हटने लगी है।
एक सूरज सत्य का अब उग रहा है,
मोमबत्ती झूठ की बुझने लगी है।
देख कर हैरान हैं थोथे मसीहा,
बीच की खाईं ज़रा पटने लगी है।