Thursday, 7 February 2013

तुम ..


तुम हौले से मुस्काई ...
जैसे कोई ख्वाहिश
रह गई कसमसाकर
पूरी होने को
तुम हँसी
जैसे घने कोहरे के बीच
अचानक हँस पड़ी धूप
तुम ने कुछ लफ्ज़ हवा में तैराए
सफ़ेद चादर पर छितर गए
सात रंग चटकीले
तुम उँगलियों से
चेहरे पर आयी लट हटाती रही
मेरे मन में अनगिन प्रश्न
उलझते-सुलझते रहे
तुम्हारी नज़रें मेरी नज़रों से मिलीं
मेरा तन बदन होता गया गुलाबी
तुमने कदम बढ़ाये
खिलते गए गुलाब
तुम्हारे क़दमों के आगे
और पीछे ....
महकती रही मिट्टी देर तलक
-प्रवीण कुमार श्रीवास्तव


Friday, 4 January 2013

2-हाइकू

रोता रहा मैं
ट्वीट कर वो चला
बहुत खला

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ग़म में हम
फेसबुकिया सारे
लाइक मारें

Friday, 7 December 2012

पाँच हाइकू सम्माननीय किसान बंधुओं के लिए-


और की भूख
परिणाम सम्मुख
भूमि बंजर

भूमि है माता
भर देगी उदर
प्यार तो कर

पाले उदर
दवा के नाम पर
दे ना ज़हर

चला फावड़ा
कृषिभूमि में सच
स्वर्ण है गड़ा

पसीना बहा
खेत का है संदेश
आँसू ना बहा


Tuesday, 4 December 2012

हाइकू दिवस पर

साहित्याकाश
प्यारे हाइकु तारे
चमकें सदा

काव्य नभ के
झिलमिल सितारे
हुए हाइकु

गीत सूरज
ग़ज़ल आफ़ताब
हाइकू तारे

Sunday, 25 November 2012

जीवन क्या है?:हाइकू

जीवन क्या है?
उसके जैसा जानूं
इरोम चानू
जीवन क्या है?
सातवाँ सिलेण्डर
पेट की आग
 जीवन क्या है?
शहर में अकेला
गाँव का मेला
जीवन क्या है?
कभी तो चुटकुला
कभी पहेली
 जीवन क्या है ?
सच को छुपा जाना
झूठ दिखाना
क्या है जीवन?
अपनी अलमारी
पराया धन
जीवन क्या है?
जीने को तो जी लिए
जान न सके
जीवन क्या है?
वट जैसा जीवट?
.........छुईमुई-सा?
 
 
 
 
 
 

"वार्षिकोत्सव:श्री हरिश्चन्द्र शिक्षा सदन,सनगांव"

श्री हरिश्चंद्र शिक्षा सदन विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा वार्षिकोत्सव के अवसर मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किये गए। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या प्रीती श्रीवास्तव, शिक्षिकाएं सोनम श्रीवास्तव, सोमवती, प्रतिभा, बीना श्रीवास्तव,पुष्पलता एवं विद्यालय समिति की अध्यक्षा उमा श्रीवास्तव सहित ओमप्रकाश वर्मा,गजराज जी, श्रद्धा श्रीवास्तव, नत्थूलाल जी, नरपत सिंह,चंद्रभूषण,दिनेश चंद्र, अमरीश जी, विनीत सिंह, राजकुमार, मोतीलाल,अरुण आदि उपस्थित रहे।सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पश्चात् आयोजित कविसम्मेलन में ख्यातिलब्ध कवियों द्वारा काव्यपाठ किया गया।
डांडिया नृत्य करतीं विद्यालय की छात्राएँ -कु. संगीता,सुमन,लक्ष्मी व अन्य
मेधावी छात्र उमेश कुमार को "श्री हरिश्चन्द्र मेधा अलंकरण पुरस्कार " प्रदान करते बाएं से क्रमशः श्रीमती प्रीती श्रीवास्तव(प्रधानाचार्य),श्रीमती उमा श्रीवास्तव(अध्यक्षा),श्री महेन्द्र नाथ बाजपेयी ,श्री श्रवण कुमार पाण्डेय 
 मेधावी छात्र उमेश कुमार को "श्री हरिश्चन्द्र मेधा अलंकरण पुरस्कार " प्रदान करते बाएं से क्रमशः श्रीमती उमा श्रीवास्तव,श्री महेन्द्र नाथ बाजपेयी ,श्री श्रवण कुमार पाण्डेय  एवं डॉ . शैलेष गुप्त 'वीर'(संपादक:अन्वेषी पत्रिका)
कार्यक्रम का रसास्वादन करता जनसमूह

Wednesday, 10 October 2012

गंगास्नान

गाँव के सभी लोग आज सुबह से ही बहुत प्रसन्न थे पूरे गाँव में चहल-पहल थी हो भी क्यों ना आखिर साल में एक ही बार तो सारे लोग साथ में गंगास्नान के लिए जा पाते हैं.ठीक आठ बजे ही ट्रैक्टर गाँव के किनारे वाले मंदिर के सामने खड़ा हो गया.धीरे धीरे औरतें मर्द बच्चे सभी आकर ट्रैक्टर में बैठने लगे.थोड़ी ही देर में पूरी ट्राली भर गई और गंगा मैया की जय की गूँज के साथ ट्रैक्टर चल पड़ा औरतें ढोलक मंजीरा झांझ के साथ आई थीं लोकगीत शुरू हो गया....हो गंगा मैय्या जय होय,जैहो तुम्हार .......माई धोय देओ पाप हमार हो गंगा मैय्या. पहुँचते ही लोग ट्रैक्टर से उतर कर कर घाट की तरफ बढ़ने लगे अचानक ठाकुर साहब एक जगह ठिठक गए.वहां पर लगे एक सूचना पट को देर तक निहारने के बाद जोर से बोले देखो भाई यहाँ लिखा है कि कोई गंदगी नहीं करेगा और ना ही फूल पत्ती, सिक्के गंगा में डालेगा.इतना सुनते ही औरतों में खुसर-फुसर शुरू हो गई "हुंह बड़े आये पढ़इय्या अइसे कईसे होई फुसफुसाते हुए सब घाट कि तरफ बढ़ गए सब ने खूब स्नान किया और सभी ने ठाकुर साहब से नजरें बचाकर घर से लाई गई खिचड़ी सिक्के पुरानी मूर्तियाँ और पालीथीन सहित फूल,सब गंगा के हवाले कर दिया ठाकुर साहब यह सब चुपचाप देखते रह गए.लौटते समय सब बहुत प्रसन्न थे.ट्रैक्टर में बैठते ही ढोलक की थाप पर लोकगीत शुरू हुआ साल-साल घाटे पे अईबे ....बार-बार गंगा नहइबे....ठाकुर साहब मन ही मन सोचते रहे कि शायद ही इस गीत के शब्द सच हो पायें.
                                                     प्रवीण कुमार श्रीवास्तव
                                                                 फतेहपुर (.प्र.)
copyright@praveen kumar srivastav
चित्र गूगल से साभार