Wednesday, 7 September 2016

आम आदमी खाट ले गया

साठ साल का ठाट ले गया
राज ले गया पाट ले गया
सोयेगा ना सोने देगा
आम आदमी खाट ले गया

पहले सर से ताज उतारा
फिर ज़मीन से पैर उखाड़े
शायद अब तय हुआ यही है
नहीं चलेंगे अब रजवाड़े

थोड़ी सी जो नाक बची थी
इसी बहाने काट ले गया

सोयेगा ना सोने देगा
आम आदमी खाट ले गया

गुड़ गन्ना का पता नहीं है
बातें हैं कलकत्ता की
सीधे सीधे क्यों ना कहते
राह चाहिए सत्ता की

इज़्ज़त का कर दिया कचूमर
करके बारहबाट ले गया

सोयेगा ना सोने देगा
आम आदमी खाट ले गया

अंदर सोने की थाली है
तरह तरह का मेवा है
छप्पन भोग सजे हैं भीतर
बाहर करे कलेवा है

राजमहल की पोल खुल गयी
रघुवा तोड़ कपाट ले गया

सोयेगा ना सोने देगा
आम आदमी खाट ले गया

क्यों अभाव की सुने कहानी
पात्र स्वयं जो किस्से का
साठ साल में मिला नहीं क्यों
जो था उसके हिस्से का

अब झुनझुना तुम्हारे हिस्से
अपने हक़ की हाट ले गया

सोयेगा ना सोने देगा
आम आदमी खाट ले गया

समझ सको तो इसको समझो
लूट नहीं संकेत हुआ है
साठ साल की राजनीति में
यही देश के साथ हुआ है

घोटालों की जड़ कांधे पे
रख के मुर्दाघाट ले गया

सोयेगा ना सोने देगा
आम आदमी खाट ले गया
          :©प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

Wednesday, 31 August 2016

हाइकू

दिल्ली की आज की दो ख़बरों पर  एक हाइकु।
यदि लगे कि दोनों स्थितियों पर एक ही हाइकु सटीक है तो लाइक करके आशीष प्रदान करें।

हे भगवान!
आख़िर डुबा ही दी
'आप' ने दिल्ली
    :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
      फतेहपुर उ.प्र.
      08896865866

Sunday, 28 August 2016

दिखा कुछ कुछ

रात के बाद ये लगा कुछ कुछ
अब उजाले से राब्ता कुछ कुछ

चल पड़ा आज जब अकेला मैं,
खुल रहा एक रास्ता कुछ कुछ

मौत का खौफ़ हो गया जिस शब,
बस उसी रात मैं जिया कुछ कुछ

अब दवा का असर दिखा मुझ पर
काम करने लगी दुआ कुछ कुछ

दरमियाँ दूरियाँ हुईं जब से,
ख़्वाब इक टूटता लगा कुछ कुछ
         ©प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

Friday, 26 August 2016

सोने दो


एक इंसान ..
डेवलप (?) हो रहे देश में
अपनी अर्धांगिनी की लाश
काँधों पर ढो रहा है
विकास का सपना पाले
आम इंसान हैरान है
हाय! यह क्या हो रहा है?
उसके ऊपर टूट पड़ा पहाड़
क्या उसके पास
समय की कमी है
या असीमित सहन शक्ति
आख़िर वो
क्यों नहीं रो रहा है
चलने दो चलचित्र
बदलने दो दृश्य
म्यूट कर के
शांति से देखते रहो
श्श!!!! कुछ मत कहो
खिंचा रहने दो परदा
जीत की थकन उतरी नहीं है
युद्ध हाल फ़िलहाल होना नहीं है
सोने दो....
छोटी सी बात के लिए
मत जगाओ
राजा सो रहा है
   :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
     फतेहपुर उत्तर प्रदेश
      08896865866

Thursday, 25 August 2016

उतने बदले रूप।

जितनी पड़ीं ज़रूरतें, उतने बदले रूप।
तू अर्जुन की छाँव है, दुर्योधन की धूप।।
कैसे इस उपकार को, भूलेगा संसार।
एक कृष्ण के जन्म से , पापी मिटे हज़ार।।

Saturday, 13 August 2016

अब कुछ तो

1222 1222 1222 1222
बहुत दिन बाद  ये भरने लगा है घाव अब कुछ तो।
हमारे देश में दिखने लगा बदलाव अब कुछ तो।
दिलों के दरमियाँ पैदा हुई थी दूरियाँ कितनी,
जो मन की बात कह दी कम हुआ अलगाव अब कुछ तो।
बरसने से लगे डरने जो कड़वे बोल ये बादल
नदी में नफरतों की आ गया ठहराव अब कुछ तो।
ज़मीं के स्वर्ग से हूरों के आशिक जा रहे ज़न्नत,
मेरे कश्मीर में कम हो रहा भड़काव अब कुछ तो।
अमीरों के लिए केवल नहीं सरकार चलती है,
गरीबों के लिए होने लगे प्रस्ताव अब कुछ तो।
   :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'

Sunday, 7 August 2016

गोरक्षा

कुछ शरारती कर रहे, हिंदु धर्म बदनाम।
गोरक्षा की आड़ में, गोरखधंधा आम ।।
        :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'