Monday, 16 May 2016

फुरसतिया

यार ये बग़दादी नाम कैसे पड़ा होगा? प्रवीण प्रसून के दिमाग़ में फतेहपुरिया फ़ितूर कौंधा।
काफ़ी कपालभांति के बाद जब कुछ पल्ले नहीं पड़ा तो पहुँच गए फुरसतिया के पास।
फुरसतिया ने पहले पान मसाले की पीक मारी फिर समझाया य तो बहुतै आसान सवाल है। बगदादी  आतंकी किरवा(कीड़ा) पालै वाला मनई। असल नाम है bug daddy। तुम्हरे अइस हिन्दी के पढ़ेरी बग दादी पढ़ि लिहिन। होइगा.....
मैं सर खुजलाते हुए लौट पड़ा।

छोटी मछली

Sunday, 15 May 2016

इश्तेहार लाया हूँ


नफरतों का ग़ुबार लाया हूँ।
मैं ज़ुबाँ में कटार लाया हूँ।

नाम हो जाय अदब में मेरा,
एक चेहरा उधार लाया हूँ।

पंख रंगीन और मिल जाएं,
एक सियासी बयार लाया हूँ।

अम्न वाली ज़मीं में बो देना,
भर के मुट्ठी में ख़ार लाया हूँ।

धर्म वाली दुकान में टाँगो,
मुफ़्त के इश्तेहार लाया हूँ।

Tuesday, 10 May 2016

दोहे

हमें न डिग्री चाहिये, हो विकास भरपूर।
क्यों कबिरा को पूजते, थे मसि कागद दूर।

बीटेक एमटेक बाद कुछ, मचा रहे आतंक।
लेकर डिग्री देश को, मार रहे हैं डंक।

डिग्री लेकर सोचते, बन बैठे हम बाप।
अभी और मेहनत करो, बेटा ही हो 'आप'।

सुनो केजरीवाल तुम, है तुममें उलझाव।
मोदी की डिग्री सुनो! राष्ट्रभक्ति का भाव।

बेमतलब की बात को, मत दो ऐसे तूल।
पीएम मोदी सा हमें, सौ सौ बार क़बूल।

अन्ना के विश्वास पर, दिये अँगूठा मार।
सबकी डिग्री लग रही, अब इनको बेकार।
    प्रवीण श्रीवास्तव 'प

Saturday, 7 May 2016

जननी भारत माता

राणा के भाले ने रच दी ऐसी गौरव गाथा।
धन्य हो गई वीर प्रसूता जननी भारत माता।

पिता उदय सिंह महाराज माता जयवंता बाई,
शिशु प्रताप को स्वाभिमान की घुट्टी गयी पिलाई,
सर कट जाये चाहे लेकिन झुके न अपना माथा।

आतताइयों को उनकी ही भाषा में समझाया,
शेरों ने गीदड़ सेना को जमकर धूल चँटाया,
राणा ने हल्दीघाटी में वो इतिहास रचा था।

गढ़चित्तौड़ खड़ा है अब तक देखो सीना ताने,
सुना रहा है नव पीढ़ी को किस्से वही पुराने,
जिस पौरुष ने अपनी माटी का अभिमान रखा था।

चेतक ने भी राजपुताना पौरुष बल दिखलाया,
स्वामिभक्ति में सबसे ऊपर अपना नाम लिखाया,
युद्धकुशलता और बुद्धि में वह मालिक जैसा था।

समय माँगता है अब फिर से राणा वाला पौरुष,
आतंकी का चोला पहने दुश्मन आया फिर घुस,
दिखला दो राणा प्रताप ने कैसा युद्ध लड़ा था।
      -प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून'
       फतेहपुर उ.प्र.

Thursday, 5 May 2016

मशविरा करे कोई


इश्क की जो हवा करे कोई।
दर्द से क्यूँ मरा करे कोई ।

चूम ले आसमान का चेहरा,
यूँ लहर भी उठा करे कोई।

धूप में भी ज़मी हरी रक्खे,
पौध ऐसी उगा करे कोई ।

हो सितारे ज़मीन पे रोशन,
रात से मशविरा करे कोई।

रास्ता छोड़ कर वफ़ा वाला,
किस तरह सामना करे कोई।

आँधियाँ कुछ न कर सकीं मेरा,
चुपके चुपके दुआ करे कोई।

कोई मुट्ठी में किस्मतें लाया,
हाथ अपने मला करे कोई।
    :प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून

Sunday, 1 May 2016

पाँच हाइकु

1.
विकास पथ
ऊँच-नीच का भाव
खींचता पाँव
2.
जीवन पथ
धूप-छाँव समेटे
बढ़ सतत
3.
मन सँजोये
श्वेत-श्याम तस्वीरें
बीते दिनों की
4.
जिंदगी ट्रेन
बनते-बिगड़ते
रिश्ते हज़ार
5.
एक ही राह
मंज़िल कब्रगाह
धनी-निर्धन